मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, April 24, 2012

अनपढ़ माँ ?

अनपढ़ माँ ?


उसे मालूम है

कि विद्यालय कहाँ है 

मगर बता नहीं सकती

कि किस दिशा में है ।

कभी वास्ता ही नहीं पड़ा,

मुझे छोड़ने जाती थी 

मुख्य द्वार तक 

और वहीँ से लौट आती थी ।


वो नहीं पढ़ सकती थी 

मेरी अंकतालिका के अंक ,

दैनन्दिनी में लिखे निर्देश ,

चौराहे पर लगा साइनबोर्ड ,

टी. वी. स्क्रीन पर चलते समाचार ।


मगर वो पढ़ लेती है 

मेरे माथे की शिकन,

मेरे चेहरे के भाव ,

मेरे ह्रदय के उदगार ,

मेरे मन की हर बात ।


अंगूठा लगाती है 

अपने नाम की जगह 

दस्तखत के लिये 

मेरी अनपढ़ माँ ।


क्या वाकई अनपढ़ ?


प्रवेश 

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