मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, March 16, 2012

दोस्ती करोगे ?


दोस्ती करोगे ?


नाटा कद 

चपटी नाक 

धँसी हुई आँखें 

उलझे केश 

विशाल दन्त 

चीथड़ों में लिपटा 

एक खुरदरा जिस्म

फटे कपड़ो से 

बाहर झाँकते 

नये पुराने जख्म ,

जैसे जख्मों की 

चलती - फिरती 

प्रदर्शनी हो ।

दुनिया जहाँन  की 

तमाम बदसूरती 

तमाम खामियाँ ।

बस एक ही खूबी 

सीने में एक सोने का दिल ।

क्या आप दोस्ती करोगे ?



                         प्रवेश 

2 comments:

  1. Bahut Sunder.....Bas ek dil hi to nahi milta aajkal......

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  2. बहुत खूब लिखा है प्रवेश जी

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