मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, February 3, 2012

पाँचसितारा


पाँचसितारा 

श्रीमती जी बोली 

यूँ ही हँसी ठिठोली 

नहीं बना खाना 

आज नया बहाना 

कहीं बाहर चलें 

स्वाद बदलें 

चलो पाँचसितारा 

समझो इशारा 

मैं कुछ ना बोला 

अपनी जेब को तोला

विचार बदल दिये

दोनों चल दिये 

पहुँचे पाँचसितारा 

गौर से निहारा 

बैरे को आदेश दिया 

उसने झट सब पेश किया 

भरपेट खाया 

फिर बिल आया 

वाह रे पाँचसितारे

दिन में दिखे तारे |

                           प्रवेश

No comments:

Post a Comment