मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Saturday, January 21, 2012

ऐसा गीत सुनाओ प्रिये !

ऐसा गीत सुनाओ प्रिये !

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि सारे तार बजें मन के |
ऐसी धुन और सरगम हो
सारे गीत हों जीवन के |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि बहता पानी जाये ठहर |
वक़्त का दरिया थम जाये
रुक जाये ये घड़ी पहर |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि लगे झूमने हर डाली |
सूखी शाख हरित हो और
गाये कोयलिया मतवाली |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि काले मेघा घिर आयें |
तपती और जलती भू पर
शीतल जल बरसा जायें |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि शक्ति मिले हारे मन को |
जोश जगे, उम्मीद बँधे
स्फूर्ति मिले शिथिल तन को |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
फिर मैं कुछ ना सुनना चाहूँ |
माया के मकड़ी जाले
फिर - फिर ना बुनना चाहूँ |

                                       प्रवेश

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर उनको शत शत नमन!

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