मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, January 17, 2012

मैंने तारे गिने


मैंने तारे गिने 


मैंने तारे गिने 

बहुत सारे गिने |


शबनम की बरसती 

बूँदें गिनी 

दिल में दहकते

अंगारे गिने 

मैंने तारे गिने |


चाँद के चेहरे पे 

धब्बे गिने 

आसमान के 

किनारे गिने 

मैंने तारे गिने |


बीते  पल 

सुहाने गिने 

आँसू के बहते 

धारे गिने 

मैंने तारे गिने |


बिजली के तार पर

उल्लू गिने 

गली के कुत्ते

आवारे गिने 

मैंने तारे गिने |


हाथ फेरता रहा 

अपने गालों पर 

दाढ़ी के बाल भी 

सारे गिने 

मैंने तारे गिने |


विरह ने मुझे 

गिनती सिखा दी 

देखो प्रिये 

मैंने क्या - क्या गिना !!


सब तुम्हारी यादों के 

सहारे गिने |

मैंने तारे गिने 

बहुत सारे गिने |

                              प्रवेश 

2 comments: