मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, January 10, 2012

रिश्तों की डोर


रिश्तों की डोर


ये जो रिश्तों की डोर है 

इधर भी एक छोर है 

उधर भी एक छोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


गर विश्वास है , मतैक्य है 

और समझ है आपसी 

तो आनंद की एक सांझ है 

उम्मीद की एक भोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


गर पैदा हो जाये 

कोई ग़लतफ़हमी 

और विश्वास उठ जाये तो 

बड़ी नाजुक है , कमजोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


"मैं" की गुंजाइश नहीं 

जोर आजमाइश नहीं 

"हम " का गर भाव है 

डोर में बहुत जोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है


इधर भी एक छोर है 

उधर भी एक छोर है ....


  प्रवेश

2 comments:

  1. लाजवाब
    बहुत सुन्दर भावनाएं....

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति| धन्यवाद|

    ReplyDelete