मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, January 25, 2012

दादी सठिया गयी हैं


दादी सठिया गयी हैं 

दादी सठिया गयी हैं ...

कहती हैं कि 

प्रवचन का चैनल लगाओ 

या श्वेत -श्याम गाने |

नये गाने मत सुनो

मत देखो  

किसी भी बहाने |

लगता है 

दादी सठिया गयी हैं |


नया फैशन 

नया ज़माना 

दादी क्या जाने |

मेरे पहनावे पर भी 

तंज कसती हैं 

देती हैं ताने |

लगता है 

दादी सठिया गयी हैं |


टोकती हैं 

जब तैंयार होती हूँ 

कहीं बाहर जाने |

बात ना करना 

किसी से 

जो मिले अनजाने |

लगता है 

दादी सठिया गयी हैं |


ना मानूं उनकी 

बात कोई 

लगती हैं खिसियाने |

कहाँ से लाऊँ

कोई गुरु 

दादी को समझाने |

लगता है 

दादी सठिया गयी हैं |

                                 प्रवेश

Saturday, January 21, 2012

ऐसा गीत सुनाओ प्रिये !

ऐसा गीत सुनाओ प्रिये !

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि सारे तार बजें मन के |
ऐसी धुन और सरगम हो
सारे गीत हों जीवन के |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि बहता पानी जाये ठहर |
वक़्त का दरिया थम जाये
रुक जाये ये घड़ी पहर |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि लगे झूमने हर डाली |
सूखी शाख हरित हो और
गाये कोयलिया मतवाली |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि काले मेघा घिर आयें |
तपती और जलती भू पर
शीतल जल बरसा जायें |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि शक्ति मिले हारे मन को |
जोश जगे, उम्मीद बँधे
स्फूर्ति मिले शिथिल तन को |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
फिर मैं कुछ ना सुनना चाहूँ |
माया के मकड़ी जाले
फिर - फिर ना बुनना चाहूँ |

                                       प्रवेश

Friday, January 20, 2012

मेरा दीवानापन अलग है

मेरा दीवानापन अलग है

कभी साथ ही खेला किये खाया किये हम |
अब जवानी की बात है, बचपन अलग है ||

क़यामत तक हमराह बनने की कसम क्या !
कहते नहीं क्यों अब तुम्हारा मन अलग है ||

नजर आये तुम्हे कुछ और ही शीशे में शायद |
अब ये ना कह देना कि ये दरपन अलग है ||

तुम नही हो आज तो तनहा नहीं मैं |
महफ़िलें हैं और सूनापन अलग है ||


दीवाने हैं मगर खुद सा दीवाना समझ ना लेना |
तुम्हारी दीवानगी से मेरा दीवानापन अलग है ||

                                                        प्रवेश 

Tuesday, January 17, 2012

मैंने तारे गिने


मैंने तारे गिने 


मैंने तारे गिने 

बहुत सारे गिने |


शबनम की बरसती 

बूँदें गिनी 

दिल में दहकते

अंगारे गिने 

मैंने तारे गिने |


चाँद के चेहरे पे 

धब्बे गिने 

आसमान के 

किनारे गिने 

मैंने तारे गिने |


बीते  पल 

सुहाने गिने 

आँसू के बहते 

धारे गिने 

मैंने तारे गिने |


बिजली के तार पर

उल्लू गिने 

गली के कुत्ते

आवारे गिने 

मैंने तारे गिने |


हाथ फेरता रहा 

अपने गालों पर 

दाढ़ी के बाल भी 

सारे गिने 

मैंने तारे गिने |


विरह ने मुझे 

गिनती सिखा दी 

देखो प्रिये 

मैंने क्या - क्या गिना !!


सब तुम्हारी यादों के 

सहारे गिने |

मैंने तारे गिने 

बहुत सारे गिने |

                              प्रवेश 

Friday, January 13, 2012

हाइकु - फिर रात गुजरी

हाइकु -फिर रात गुजरी 

सोते तुम्हारी

फिर रात गुजरी

रोते हमारी |


                         प्रवेश 

Thursday, January 12, 2012

Have you seen Him!!

Have you seen Him!!

Have you ever seen Him
Either fat or slim.
What kind of size and shape
A watermelon or a grape.

I never saw but have heard
His grace in flying bird.
His presence in everything
Cattle, creeper, human being.

In flowing river, shining rays
I never saw, my grandma says.
I never saw but have felt
When ice-cream of mine melt.

He is friend of everyone
He can see in trouble none.
It's only by His grace
A turtle can win the race.


                                      Pravesh

Tuesday, January 10, 2012

रिश्तों की डोर


रिश्तों की डोर


ये जो रिश्तों की डोर है 

इधर भी एक छोर है 

उधर भी एक छोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


गर विश्वास है , मतैक्य है 

और समझ है आपसी 

तो आनंद की एक सांझ है 

उम्मीद की एक भोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


गर पैदा हो जाये 

कोई ग़लतफ़हमी 

और विश्वास उठ जाये तो 

बड़ी नाजुक है , कमजोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


"मैं" की गुंजाइश नहीं 

जोर आजमाइश नहीं 

"हम " का गर भाव है 

डोर में बहुत जोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है


इधर भी एक छोर है 

उधर भी एक छोर है ....


  प्रवेश

Sunday, January 8, 2012

वाह प्रवेश...!!


वाह प्रवेश...!!


वाह प्रवेश...!!

बड़े कमाल के हो तुम ,

जिसे ना मिलो 

वो अफ़सोस के आँसू बहाये 

और मिल जाओ जिसे 

वो ख़ुशी के आँसू

रोक ना पाये |

वाकई ... 

बड़े कमाल के हो तुम |


   प्रवेश

Wednesday, January 4, 2012

क्या करुल ऊ पहाड़ जाबेर


क्या करुल  ऊ पहाड़ जाबेर 


क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर |

येती घर भतेर पाणिक नल लाग रो 

वोति पाणि को सारौल गाड़ जाबेर |

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||


गैसक सिलेंडर लै टैम पारि ऐ जांछ 

वोति लकड़ को ल्याल वोतुक टाड़ जाबेर | 

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||


ना खुट तिणन , ना कच्यार लागुन  

कमर पीड़ लै भलि छौ आड़ पाबेर |

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||


पैदल हिटणम आब घुन दुखनी 

पराण नहे जिल ऊ ठाड़ जाबेर |

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर || 


ना सासुक कचकचाट, ना सौरुक रिसाँण 

चैन पारि छू पहाड़ बे टाड़ आबेर |

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||


चेलि पारि बुढई सासु भूतिणि हबे लाग रे  

च्यौल लै नाचुन हरो मसांण लाग बेर |

पूजूंण तो पडौल  ऊ पहाड़ जाबेर ||

बकाई हम क्या करुल  ऊ पहाड़ जाबेर || 


शब्दार्थ :

सारौल = ढोयेगा 

ल्याल = लायेगा 

टाड = दूर 

तिणन = फटना 

कच्यार = कीचड़ 

हिटणम = चलने में 

घुन = घुटने 

ठाड़ = चढ़ाई 

रिसाँण = गुस्सा होना , डाँटना 

मसांण  = भूत 

                               प्रवेश

Monday, January 2, 2012

चुनावी भोंपू


चुनावी भोंपू 


पाँच साल बाद 

फिर से ये भोंपू की आवाज ..

आज भी

उतनी  ही मधुर है ..

पार्टी का नाम लेकर 

विजयी बनायें ,

विजयी बनायें के नारे 

कितने प्यारे 

और मधुर स्वर में 

वातावरण में गुंजायमान हो रहे हैं ...

धीमे स्वर में 

पिछली चूकों पर माफ़ी 

और नये वादों की सूची 

पढ़ी जा रही है 

बड़े अपनेपन के साथ |

ये ढोर - डंगरों की तरह 

खदेड़ कर लायी गयी

भोली जनता ,

जो ताली बजा रही है 

हर वाक्य के अंत में ,

बड़ी धैर्यवान है 

और आशावान भी |

ये माफ़ कर चुकी है 

पुराने गुनाह 

और

आज के वादों की

सच्चाई भी बखूबी जानती है ..

फिर भी शोर तो सुनिये 

करतल ध्वनि का ...


                       प्रवेश