मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, December 12, 2011

हाइकु - सर्दी की सुबह


हाइकु - सर्दी की सुबह 



कँपाती भोर 

ठिठुरता सूरज 

सिकुड़ा हुआ |


हटा कोहरा 

चमकती किरणें 

शीतल घाम |


आधी नींद से 

जग उठी दुनिया 

अंगडाई सी |


                            "प्रवेश "

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