मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, October 11, 2011

ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह जी को श्रद्धांजलि 

तुम जीतकर जग चले गये |
तुम जिधर चले पग चले गये |
तुम जीतकर जग चले गये |

तुम मौन हुये तो कलरव शून्य
डाल छोड़ खग चले गये |
तुम जीतकर जग चले गये |

तुम्हारी बीमारी का गम ही क्या कम था
जो छेड़ दुखती रग  चले गये |
तुम जीतकर जग चले गये |

अपनी सुर और स्वर गंगा से
पावन कर जग चले गये |
तुम जीतकर जग चले गये |

तुम गये तो यूँ सब ठगे रह गये ,
सारे जग को ठग चले गये |
तुम जीतकर जग चले गये |


                                          "प्रवेश "

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