मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, October 5, 2011

संकर पीढ़ी

संकर पीढ़ी 

ना ही अंग्रेजी जानें ये 
और ना हिंदी ही आती |
इनके मुख से निकलने में 
दोनों भाषाएँ लजाती |

हिंदी में अंग्रेजी डालें 
अंग्रेजी में हिंदी |
इसीलिए भाषा के विषय में 
आती इनकी बिंदी |

शर्म नहीं महसूस करो 
यदि अंग्रेजी का ज्ञान नहीं |
चुल्लू भर पानी में डूब मरो 
यदि हिंदी पर अभिमान नहीं |

भले अनेक भाषाएँ सीखो 
किन्तु अधूरा ज्ञान न हो |
तुम्हारी नादानी से किसी 
भाषा का अपमान न हो |

कैसे साहित्य , समाज चढ़ेगा 
विकास की नयी सीढ़ी |
संकर साहित्य , समाज रचेगी 
आज की संकर पीढ़ी  |


                                   "प्रवेश "

2 comments:

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति प्रवेश भाई
    क्या बात है उम्दा पंक्तियाँ .......
    शर्म नहीं महसूस करो
    यदि अंग्रेजी का ज्ञान नहीं
    चुल्लू भर पानी में डूब मरो
    यदि हिंदी पर अभिमान नहीं

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  2. सत्य ! प्रवेश सच्ची बात ....

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