मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, September 8, 2011

वाह री मेरी पिलानी

वाह री मेरी पिलानी 

वाह री मेरी पिलानी 
सड़क में गड्ढे ही गड्ढे 
गड्ढों में पानी ही पानी 
वाह री मेरी पिलानी |

यूँ तो बहुत कुछ है ,
सभाओं में बोलने के लिए |
एक ही बारिश काफी है ,
पोल खोलने के लिए | 
सभाओं में सुनी जाती है 
कर्णप्रिय और अमृत बानी |
वाह री मेरी पिलानी |

सड़क में गाड़ियों से 
गड्ढों की संख्या ज्यादा है |
अगले चुनाव से पहले 
सड़क सुधारने का भी वादा  है |
कथनी से करनी की 
है रंजिश बड़ी पुरानी |
वाह री मेरी पिलानी |

कहीं कूड़ा , कहीं कीचड 
ख़बरें भी हैं अख़बारों में |
साफ़- सफाई के अनगिनत 
फायदे  भी हैं इश्तहारों  में |
ये  सब सच है, मिथ्या नहीं ,
समझें न मनगढ़ंत कहानी |
वाह री वाह , वाह री वाह ,
वाह री मेरी पिलानी |

                                         "प्रवेश "

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