मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, August 19, 2011

रुक जाना नहीं


रुक जाना नहीं

उठो , जागो , आगे बढ़ो 

अब कदम रुकने पाये ना ,

बेईमान ठेकेदारों के सम्मुख 

मस्तक ये झुकने पाये ना |



अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति है ,

सब जानकर यदि मौन हो ,

तंत्र को बुरा या भला 

कहने वाले फिर कौन हो !



न बंद नयनों को करो ,

पर  जोश  पर लगाम हो ,

सजग हर इन्द्री रहे ,

मन को नहीं विश्राम हो |



कुछ न  हो , एक जुनूं हो 

अन्याय के प्रतिरोध का ,

सच्ची लगन सच की तरफ ,

न भाव हो प्रतिशोध का |



संघर्ष आज का तुम्हारा 

व्यर्थ जायेगा नहीं ,

ऐसे पावन यज्ञ का फिर 

मुहूर्त आयेगा नहीं |
                                          

                                    "प्रवेश "

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