मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, August 9, 2011

जबान की सफाई


जबान की सफाई 

कभी -कभी तो साँसों में 
इतनी बदबू आती है ,
खुशमिजाज महबूबा भी 
पल में बेरूख हो जाती है |

साँसों की बदबू मिलन को 
पल में कर दे जुदाई ,
इसीलिये जरूरी है ,
जबान की सफाई |

जबान की गन्दगी से 
चरित्र से भी बू आती है ,
महफ़िल में रुसवा होते हैं ,
इज्जत रफू हो जाती है |

भाई को दुश्मन बना दे 
दुश्मन को बना दे भाई ,
निहायत ही जरूरी है ,
जबान की सफाई |

                             "प्रवेश "

No comments:

Post a Comment