मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, August 2, 2011

बिल



बिल 



आस्तीन में रहने वाले ,

चले हैं नया बिल बनाने |


कैसा होगा बिल का ढांचा ,

झूठा हँसेगा , फँसेगा सांचा |


निकल पायेगा यहाँ से कौन ,

जो बिल निर्माण में रहेगा मौन |


जिसने भी आवाज उठाई ,

मार डालेंगे उसे कसाई |


जो भी करेगा बिल की बात ,

रखे याद चार जून की रात |


बाहर है तबला , अन्दर ताल ,

देखें क्या होगा बिल का हाल !

                                             "प्रवेश "

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