मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, July 27, 2011

बुढ़ापा - उपेक्षा

बुढ़ापा - उपेक्षा 


जितना प्यार करता है प्यारे 

अपने प्यारे पप्पी से |

आधा भी कर पाए अगर तू 

बूढ़े पापा - मम्मी से |



उनका बुढ़ापा सुधर जायेगा 

तू भी तो कल इधर आएगा 

साथ न होगा पप्पी तेरा 

बच्चों के ही घर जायेगा |



पेड़ लगाकर कीकर का ,

उम्मीद न कर तू आम की |

एक पल में ही भूल गया ,

इनकी सेवा उम्र तमाम की !



याद अगर है तुझको ,

तेरी खातिर इनके कुछ बलिदान |

इनकी सेवा  कर पहले ,

खुश हो जायेंगे सब भगवान |



कुछ वक़्त निकाल इनकी खातिर ,

कुछ सोच कर विचार कर |

प्यार चाहता है अगर ,

तो माँ - बाप से प्यार कर |

                                        

                                         "प्रवेश "

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