मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, June 27, 2011

सियासी गलियारे

सियासी गलियारे 

बड़ी चहल - पहल है यहाँ ,
बड़े दिलकश नज़ारे हैं ,
ये सियासी गलियारे हैं |

यहाँ कोई दुश्मन नहीं ,
पर दोस्तों का खौफ है |
दुश्मनों से दोस्ती 
पुराना सियासी शौक है |

जुबाँ पर मीठे बोल हैं ,
मगर दिल में अंगारे हैं ,
ये सियासी गलियारे हैं |

छूना चाहो गगन तो 
ऊंचाइयों की हद नहीं |
नीचे गिरना चाहो तो 
गड्ढों की भी सरहद नहीं |

अभी बुलंद, अगले ही पल 
यहाँ गर्दिश में सितारे हैं |
ये सियासी गलियारे हैं |

यहाँ कोई जुर्म कभी ,
होता नहीं संगीन है |
घर का ही कानून है ,
तो शाम भी रंगीन है |

जनता पे लाठी तोड़ें जो ,
इस मुहल्ले के प्यारे हैं |
ये सियासी गलियारे हैं |

एक बार इन गलियों में 
जो भी प्रवेश कर जाता है |
या राज दिलों पे करता है ,
या दिल से उतर जाता है |

कितने ही बिठाये गद्दी पर,
जाने कितने उतारे हैं |
ये सियासी गलियारे हैं |


                                    "प्रवेश "

No comments:

Post a Comment