मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, June 14, 2011

उल्लंघन

उल्लंघन 

कभी अनशन , कभी सत्याग्रह , कभी आन्दोलन करना पड़ता है ,
मेरे देश में एक कानून बनाने के लिये |
तोड़ दिया जाता है , झाड़ू की सींक सा ,
रिश्वत से पैंसा कमाने के लिये |
हर वाहन में यात्रियों की संख्या को लेकर ,
प्रावधान है दुर्घटना से बचने के लिये |
कल ही रिश्वत लेते - देते देखा ,
पुलिस से बच निकलने के लिये |
दस की जगह में पन्द्रह को लेकर ,
राजमार्ग पर चली जा रही थी गाड़ी |
पुलिस ने रोका , चालक से पूछा ,
इतनी सवारी कैसे भर दी अनाड़ी?
कायदा कहता है , जुर्माना लगाओ ,
पाँच सवारी उतारो , टालने को हादसा |
लेकिन सवारी उतारी ना कोई ,
चुपचाप थाम लिया एक नोट पचास का |
क्या जरूरत है ऐसे में ,
नियम - प्रावधान की !
जहाँ पचास रुपये कीमत हो ,
पन्द्रह की जान की |


                                      "प्रवेश" 

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