मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, May 18, 2011

परमानेंट स्टाफ

परमानेंट स्टाफ 

क ने ख से कहा एक दिन ,
क्यों देर से आते आप हैं ?
ख ने कहा नादान हो तुम ,
हम परमानेंट स्टाफ हैं |

देर से आना , जल्दी जाना ,
शान हमारी बढती है ,
इससे परमानेंट होने की 
पहचान हमारी बढती है |

हम एक दिन काम पे न भी आयें ,
सात खून हमारे माफ़ हैं ,
तुम दैनिक मजदूरी वाले ,
हम परमानेंट स्टाफ हैं |

एक साल में नहीं कमा 
पाते हो मजदूरी से जितना ,
एक महीने में ही मजे से 
पाते हैं हम वेतन उतना |

ये पिछले पुण्य हमारे हैं ,
पिछले ही तुम्हारे पाप हैं ,
इसीलिये तुम दैनिक हो ,
हम परमानेंट स्टाफ हैं |

सुनकर ख की बात ,
क ने चुप्पी साध ली ,
चुपचाप लग गया काम में ,
शिकायत की गठरी बाँध ली |

मजदूरी से बच्चे पालेगा,
 छः बच्चों का बाप है ,
इनका भला क्या जाता है ,
ये तो परमानेंट स्टाफ है |

                                       "प्रवेश"

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