मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Saturday, April 9, 2011

अन्नागिरी

अन्नागिरी 

बदल रहा इतिहास 
जुड़ रहा एक नया पन्ना,
गाँधी के अवतार में 
अवतरित हुए श्री अन्ना |

अन्न ना ग्रहण किया 
आमरण का प्रण लिया ,
जागृति की लहर  फैली 
हुआ हर कोई चौकन्ना |

सुनी जाती गर जन - जन की 
क्यों आती नौबत अनशन की ,
बहुत निचोड़े जा चुके हैं 
जैसे मशीन में गन्ना |

माँ भारती के लाल आये 
दूध पीते बाल आये ,
पालकी छोड़ कहार भागे,
घोड़ी छोड़ दौड़े बन्ना |

लड़ने बिना ही ढाल आये 
ले हाथ में मशाल आये,
भ्रष्टाचार का अंत और 
परिवर्तन की तमन्ना |

                                    "प्रवेश"

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