मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, April 4, 2011

सादगी

सादगी 

दोनों हथेलियों की 
रेखाओं का मिल जाना ,
गर्दन में हरकत हो ,
थोडा सिर का झुक जाना |
सादगी की और 
पहचान क्या होती है !

दूर -दूर तक 
" मैं " का नाम न हो ,
सब खास हों निगाह में,
कोई आम न हो |
सादगी की और 
पहचान क्या होती है !

जिससे भी मिलो,
मुस्कराकर मिलो ,
सब शिकवे गिले 
भुलाकर मिलो |
सादगी की और 
पहचान क्या होती है !

कोई भी टीस 
 न मन में रहे ,
कोई उलझन नहीं 
जीवन में रहे |
सादगी की और 
पहचान क्या होती है !

                                       "प्रवेश"

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