मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, March 22, 2011

श्वान - तंत्र

श्वान - तंत्र

कुत्तों की सभा में तय हुआ ,
जब राज हमारा आयेगा,
तब कोई कुत्ता , कुत्ते की
मौत न मारा जायेगा |

किस दिन हो चुनाव , कब दें 
अंजाम चुनावी दंगल को ,
ये तय हुआ मतदान 
कराया जाये आगामी मंगल को |

"कुत्ता कल्याण संगठन " से 
टॉमी लंडूरा खड़ा हुआ ,
"कुतिया बचाओ संघ" से 
जबरू भूरा खड़ा हुआ |

टॉमी को चुनाव चिह्न मिला 
एक आँख का बिल्ला ,
जबरू चले प्रचार को ,
लेकर भौंकता पिल्ला |

टॉमी - पंथी और जबरू - पंथी 
लग गए प्रचार में ,
तू - तू , मैं -मैं , झड़प हुई 
टॉमी - जबरू के वार में |

खुजली वाले कुत्तों की गली में 
जब टॉमी जी आये ,
देख उधडती चमड़ी उनकी 
थोड़ा मुँह पिचकाये |

बोले आपकी गली में 
चिकित्सा शिविर लगायेंगे ,
निःशुल्क दवा खुजली की मिलेगी 
सब चंगे हो जायेंगे |

अगले दिन जबरू भूरा जी 
उसी गली में आये ,
सभी कुत्तों के लिये
खुजली की दवा साथ में लाये |

खुजली वाली गली में 
जबरू की जय -जयकार हुई ,
ताज्जुब , उसी गली से 
जबरू जी की हार हुई |

सारे खुजली वालों ने 
बेदुम टॉमी को वोट दिये,
जबरू जी ने दवा बाँटी
टॉमी जी ने नोट दिये |

जबरू विपक्ष में विराजे 
टॉमी जी बैठे गद्दी में ,
टॉमी - पंथी , जबरू - पंथी 
बिके नहीं फिर रद्दी में |

                                  "प्रवेश"

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