मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, March 16, 2011

गर्मी में सूरज

गर्मी में सूरज 

कल तक था जो प्यारा,
आज बन गया अंगारा |

कल तक जल्दी जाता था ,
आजकल देर से भागता है ,
कल तक खूब सोता था ,
आजकल मुझसे पहले जागता है |

जाड़ों में तू सिर पर बैठे ,
तो भी सर्दी लगती है ,
आज दूर से तेरी सूरत ,
बड़ी बेदर्दी लगती है |

जब तक भोली जनता सा था ,
सबका चहेता बन बैठा ,
आज जरा मौसम क्या बदला ,
तू भी नेता बन बैठा !

याद रख , जब सत्ता की तरह ,
मौसम भी बदल जायेगा ,
उतर जाएगी सारी गर्मी ,
तू भी ठंडा पड़ जायेगा |

तू भी ठिठुर जायेगा ,
जब गर्मी बेदर्दी जायेगी ,
तू भी कोट सिलवायेगा ,
जब वापस सर्दी आयेगी 

                                           "प्रवेश"|

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