मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Saturday, March 5, 2011

आह्वान

आह्वान 

चाहे हो भगवा , पीताम्बर 
चाहे पहनी खाकी हो ,
चाहे खादीदारी  हों 
या महज लंगोट ही बाकी हो |

चाहे सभाएं करो नित्य ,
चाहे बन्दूक या कलम उठा लो ,
शांत रहो या रौद्र बनो ,
कैसे भी हो , देश बचा लो |

यज्ञ कराओ , हवन कराओ ,
गद्दारों का दहन कराओ ,
भ्रष्टों की आहुति चढ़ाकर,
अपना प्यारा वतन बचाओ |

एक नहीं , सब तैयार हों ,
क्यों मुहूर्त का इन्तजार हो ,
हफ्ते में दिन सात ही क्यों ,
आठवाँ दिन "क्रांतिवार " हो |

                                              "प्रवेश"

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