मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, March 3, 2011

है कोई ?

है कोई ?

फूहड़ और बाजारू ,
गाने वाले कई हैं ,
वीरों का गुणगान करे ,
है कोई उस्ताद ?

प्रस्तुतकर्ता कई हैं ,
दिगम्बर बालाओं के ,
है कोई ? प्रस्तुत करे ,
जनमानस का अवसाद |

चाटते दीमक कई हैं ,
राष्ट्ररूपी वृक्ष को ,
है कोई ? पोषण करे ,
जो बन उर्वरा खाद |

हैं कई , झण्डा गगन में
गाड़ दें जो जीत का,
है कोई ? जो हार का
भी कर रहा उन्माद |

है कोई ? जी जान से 
मेहनत करे मैदान में ,
कई विज्ञापन पड़े हैं ,
हैं कई उत्पाद |
                              " प्रवेश" 

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