मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, March 1, 2011

अगर आसमां में

अगर आसमां में

अगर आसमां में मैखाने होते ,
हर पाइप के नीचे पैमाने होते |

बादल भी मय लेकर बरसते ,
तरसते न मय के दीवाने होते |

सरकार भी भला क्या कर लेती ?
न पुलिस को देने हर्जाने होते |

मुफ्त ही घर में मुहैया हो जाती ,
न ठेके के चक्कर लगाने होते |

मूड बनाते कभी भी, कहीं भी ,
बनाने न सौ - सौ बहाने होते |

मोहतरमा से जूझते क्यों भला ,
पीते शान से , सीना ताने होते |

मय भी पानी की सूरत में होती ,
शराब बचाओ अभियान चलाने होते |

                                                      "प्रवेश "

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