मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, February 23, 2011

भाव बढ़ गया मेरा भी

भाव बढ़ गया मेरा भी

मत मांगते थे ,
मेरी गली से गुजरते थे ,
पर मेरे घर के आगे,
कभी नहीं ठहरते थे |

वो जानते थे मतदाता 
सूची में नहीं नाम मेरा ,
क्यों नमन मुझको करें ,
क्यों करें कोई काम मेरा |

जब मिलते तो ऐसे मिलते ,
जैसे जानते नहीं कौन हूँ मैं ,
बीच जयकारा के उनके ,
क्यों अकेला मौन हूँ मैं !

संशोधित हुई सारणी ,
नाम चढ़ गया मेरा भी ,
मैं रहा तो वही "प्रवेश",
पर भाव बढ़ गया मेरा भी  |
                                               "प्रवेश" 

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