मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, February 22, 2011

गुजारिश

गुजारिश 


जो हमने किया वो गजब तो नहीं ,
खतावार हैं बेअदब तो नहीं |

होंगे तेरे चाहने वाले लाखों ,
मगर हम जैसे वो सब तो नहीं |

झुंझला गई मेरी गुस्ताखी से ,
इंसां हैं दोनों , रब तो नहीं |

गुजारिश है माफ़ी की तुझसे खता की ,
तुझे कोई शिकवा अब तो नहीं |
        
गुजारिश मंजूर       
शिकवा भी तुमसे तुम ही से गिला है ,
ये दर्द -ए - जिगर भी तुम ही से मिला है |

तरफदार हैं हम तुम्हारी खता के ,
अपनी तरफ भी यही सिलसिला है |

बंद पलकों में भी खयाल आपका है,
खुली आँखों में ख्वाबों का काफिला है |

समझ पाओ न अब भी जज्बात मेरे ,
तो समझो आपका कोई पेंच हिला है |
                               "प्रवेश"

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