मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, February 18, 2011

तारीफ उनकी

तारीफ उनकी 

उनकी इस शिकायत को 
दूर करना चाहता हूँ ,
"तारीफ नहीं करते आप"
तारीफ करना चाहता हूँ |

आज ठाना है शिकायत 
दूर कर दूंगा सभी ,
महबूब फिर कोई शिकायत 
कर न पायेगा कभी |

कुछ कहूं , तो क्या कहूं ?
झूठ कह सकता नहीं ,
सच कहूं , महबूब मेरा 
सच को सह सकता नहीं |

धर्मसंकट आ पड़ा है ,
वर्ज्य हैं दोनों सत्य - असत्य ,
झूठ कहूं तो पाप लगे ,
महबूब खफा हो बोल के सत्य |

कोई मदद करो मेरी ,
कोई सुझाव उपयुक्त दो ,
धर्मसंकट में फंसा ,
ये मित्र आपका मुक्त हो |
                                          "प्रवेश"

1 comment:

  1. उत्तम प्रस्तुति...

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