मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, February 10, 2011

गधों को हांके कौन ?



ये जो चने का खेत है,
इसके हैं मालिक पचास |
चने के पौंधे छोटे हैं , 
पौंधों से बड़ी हो गयी घास |

एक का हो , तो खैर खबर ले ,
किसकी पचास में जिम्मेदारी ?
कौन भला ये घास उखाड़े ,
कौन करे अब घेरा - बाड़ी ?

गधे घुस गए बेधड़क ,
साफ़ कर गए पूरा खेत |
घास बची न चने बचे ,
बची रह गयी सूखी रेत |

निकम्मे मालिक हों पचास ,
तो उस खेत में झांके कौन ?
कौन करे रखवाली इसकी ,
इन गधों को हांके कौन ?

चने का खेत = प्रजातंत्र 
चने के पौंधे = जनता
मालिक = नेता  
घास = अराजक तत्व 
गधे = भ्रष्ट नेता 

                                                      "प्रवेश "

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