मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, January 20, 2011

जब से होश संभाला यारो

जब से होश संभाला यारो

जब से होश संभाला यारो ,
बस यही देखा भाला यारो |
सच्चे को दबते देखा और 
झूठे का बोलबाला यारो |
मक्कारी को फलते देखा ,
मेहनत का दिवाला यारो |
दिन में अँधियारा देखा और ,
दीपक तले उजाला यारो |
कुत्ता खाये बिस्कुट, आदमी 
तरसे देख निवाला यारो |
घर - घर संसद बनती देखी ,
नेता हर घर वाला यारो |
गोदाम में राशन सड़ते देखा ,
राशन की दुकान पे ताला यारो |
कंकड़ पत्थर दाल में देखा ,
लीद मिला मसाला यारो |
जब से होश संभाला यारो ,
बस यही देखा भाला यारो |
                                                              प्रवेश 

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